तुम जब समझोगे , मैं चूक गया हूँ !
तभी मैं नया एक, रूप लेकर आऊंगा !!
सर्द रातों में मत खोना उम्मीद कभी !
मैं सुबह फिर नई , इक धूप लेकर आऊंगा !!
रंग जो उड़ेगा वक़्त के साथ, न होना मायूस!
तुम्हारी खातिर नया स्वरुप लेकर आऊंगा !!
शोर अंदर का परेशां करे , तो बुला लेना मुझे !
मैं सुकून भरी एक चुप लेकर आऊँगा !!
-- विकास इंगले
तभी मैं नया एक, रूप लेकर आऊंगा !!
सर्द रातों में मत खोना उम्मीद कभी !
मैं सुबह फिर नई , इक धूप लेकर आऊंगा !!
रंग जो उड़ेगा वक़्त के साथ, न होना मायूस!
तुम्हारी खातिर नया स्वरुप लेकर आऊंगा !!
शोर अंदर का परेशां करे , तो बुला लेना मुझे !
मैं सुकून भरी एक चुप लेकर आऊँगा !!
-- विकास इंगले
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